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A) ऑर्गन और नियॉन
B) नियॉन और पारे की वाष्प
C) नाइट्रोजन एवं नियॉन
D) केवल ऑर्गन
Correct Answer: B
Solution :
| उत्तर- नियॉन और पारे की वाष्प |
| व्याख्या - ट्यूब लाइट के अंदर की दीवारों पर फॉस्फर (Phosphor) का लेप रहता है। ट्यूब लाइट के अंदर अक्रिय गैस-नियॉन या ऑर्गन आदि को कुछ मर्करी की वाष्प के साथ भरा जाता है। ट्यूब लाइट में मर्करी की वाष्प कम दाब पर पराबैंगनी किरणों को श्य किरणों में परिवर्तित करती है। |
| टिप्पणी - निऑन \[_{10}N{{e}^{20.18}}\], खोजकर्ता -1898 र्इ. में विलियम रैमजे एवं मॉरिस ट्रेवर्स द्वारा। |
| यह वायु से हल्की रहती है, इस कारण पृथ्वी के वायुमण्डल से बाहर विसरित जाती है। |
| उपयोग - निऑन प्रकाश का उपयोग विज्ञापनों के लिए किया जाता है। निऑन या हरा प्रकाश उत्पन्न करने के लिए निऑन के साथ मर्करी की वाष्प को मिश्रित किया जाता हैं। |
| निऑन लैम्पों का उपयोग हवार्इ जहाजों के संकेतक के रूप में किया जाता है। निऑन द्वारा उत्पन्न लाल नारंगी (Reddish- Orange) प्रकाश बहुत दूर तक दिखता है तथा कोहरे का भी उस पर प्रभाव नहीं होता। |
| विशेष - आर्गन (\[_{18}A{{r}^{40}}\]) |
| खोजकर्ता- विलियम रैमजे एवं लॉर्ड रेले (1894 र्इ) आर्गन एक रंगहीन, गंधहीन, अज्वलनशील तथा अविषाक्त गैस है। |
| इसका उपयोग रेडियो वाल्वों में किया जाता है। |
| विभिन्न रंगों का प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ऑर्गन को निऑन के साथ विसर्ग नली में मिश्रित किया जाता है। यह वायुमण्डल में नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन के बाद तीसरी सर्वाधिक पायी जाने वाली गैस है। यह वायुमण्डल में लगभग 0.93 % तथा भू-पर्पटी में लगभग 0.00015% पायी जाती है। |
| आर्गन के उपयोग- हीलियम के समान इसका भी उपयोग एल्युमीनियम व स्टेनलेस स्टील के वेल्डिंग के लिए लेकिन वातावरण उत्पन्न करने के लिए होता है। |
| विद्युत बल्बों में 25% नाइट्रोजन के साथ ऑर्गन गैस भरी जाती है। जिससे तंतु पिसंउमदज का ऑक्सीकरण नही होता है। |
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